Min daily routine herein Matuli is to wake at 3 clock and after doing all the normal routine work i look at LinkedIn sent email and inmail.Then i read Geeta for 1 hr and once the sun comes out i goes outside to have a view of this. Then i take neem leaf and take my laptop and do my normal work readings likeidn post and updating excel with indeed.I am trying to find some topic worth reading.
"नदी, मनुष्य और सागर: एक आध्यात्मिक यात्रा"
"यह भी कोई ज़िंदगी है? कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करना है और न ही यह समझ आ रहा है कि क्यों करना है। बस सब लोग कर रहे हैं, इसलिए 'करे जाओ-करते जाओ' वाला हाल है। जब कुछ नहीं करो तो करने का मन करता है, और जब कुछ करो तो लगता है कि जो कर रहे हैं उससे क्या उखाड़ लेंगे? न अपना कुछ कर पा रहे हैं, न दूसरों का। क्या कुछ ऐसा करने का कोई और रास्ता हो सकता है जिससे ज़िंदगी में सुकून मिले और अच्छा भी लगे? जीवन में एक अजीब सी बेचैनी है, आज कहीं भी ध्यान केंद्रित (focus) नहीं हो पा रहा है। शायद यह टेक्नोलॉजी के ज़्यादा इस्तेमाल की वजह से हुआ है। अब से बस एक काम को एक ही बार में पूरा करना है—जब लिख रहा हूँ, तो बस लिखता ही रहूँ और कुछ नहीं। यह बेचैनी सबको मुझसे बेहतर स्थिति में देख कर भी हो रही है; सबके पास कार है, पैसा है और मैं अगले हफ्ते से नौकरी शुरू करूँगा। हाँ, मुझे नई-नई किताबें पढ़ने में थोड़ा बहुत शौक है, चाहे वे हिंदी में हों या अंग्रेजी में, बस कहानी अच्छी होनी चाहिए।" "ज़िंदगी एक नदी की धारा की तरह ही होती है न? जब वह निकलती है तो अपने पूरे प्रवाह में होती है, अ...
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