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इंसानियत फिर एक बार शर्मसार हुई

 अक्सर जब थोड़ा करीब से हर चीज़ को देखा जाए, तो यहाँ सब बहुत सामान्य (normal) लगने लगता है क्योंकि यह इंसान की फितरत बनती जा रही है कि दूसरे का शोषण करो अपने स्वार्थ के लिए। फिर अगर इंसान ही इंसान का शोषण करे, तो इसमें आश्चर्य की क्या बात है? जब एक सिस्टम का मकसद ही यही है कि वह ज़्यादा से ज़्यादा 'प्रॉफिट' बनाए अपने मालिक के लिए, तो इसमें क्या अचरज करना कि वह मालिक सबका शोषण करे खुद को ठीक रखने के लिए, और कोई ऐसा काम कर जाए जिसे कोई सोच भी न सके। इसीलिए हिंदू धर्म में शरीर, मन और प्रकृति को चेतना (Consciousness) के नीचे रखा गया है और हमें चेतना से भी ऊपर जाना है, जहाँ सब एक हो जाएँ—खुद में और इस मिट्टी या ब्रह्मांड में कोई अंतर न लगे। यह आश्चर्य की बात है न कि हम 'अचूक' (accurate) होते जा रहे हैं, फिर भी ज़िंदगी की गहराइयाँ खोती जा रही हैं। जितना सामान और सामग्री हम जुटा रहे हैं, उतना ही खुशी से दूर भागते जा रहे हैं। जितनी टेक्नोलॉजी हमें अपनों के पास ला रही है, उतना ही अपनत्व कम होता जा रहा है। पता नहीं कैसी अजीब सी दुनिया होती जा रही है, यहाँ कैसे लोग होते जा रहे हैं! ता...

एक अनकहा सुकून

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पता नहीं जीवन कहाँ जा रहा है। एक बात बस यहाँ तक पता लगा है कि ज़िंदगी में कुछ तो चाहिए— अलग बात है कि अभी ज़िंदगी की तलाश सबसे ज़्यादा ज़रूरी थी, ताकि अपने परिवार को एक इज़्ज़त भरी ज़िंदगी दे पाऊँ। बाक़ी आगे का रास्ता साफ़ नहीं दिखता। थोड़ा-थोड़ा बचपन की चीज़ों को एंजॉय करने का मन कर रहा है— खेलना, खाना… अजीब बात है न? एक अजीब-सी तलाश में हम सब रहते हैं, जो शायद हमारे अंदर ही होती है। जब हम बच्चे होते हैं, जो चीज़ें हमें अच्छी लगती हैं, शायद वही हमारे लिए सही होती हैं। पेंटिंग और राइटिंग मुझे हमेशा से अच्छी लगी है। एक अजीब-सा सुकून मिलता है जब मैं पेंसिल से लिखता हूँ, रेखाएँ खींचकर ड्रॉइंग तैयार करता हूँ  और उसमें रंग भरता हूँ। या यूँ कहूँ कि मुझे ये किसी god ka creation से कम नहीं लगतीं। ऐसा लगता है जैसे मैं खुद एक ज़िंदगी बना रहा हूँ।

पुरुषार्थ: भाग्य बनाम कर्म

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रश्मिरथी: दानवीर कर्ण का महागाथा मैंने दिनकर जी की कविता 'रश्मिरथी' पढ़ी, जो वास्तव में एक उच्च कोटि की रचना है। इसमें कर्ण के चरित्र का जो चित्रण किया गया है, वह अद्वितीय है। महाभारत के युद्ध में, यह जानते हुए भी कि वह अधर्म के पक्ष में है, कर्ण जिस निष्ठा के साथ लड़ा, वह उसकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एक अद्वितीय व्यक्तित्व कर्ण न केवल एक महान धनुर्धर था, बल्कि वह परम ज्ञानी और दानवीर भी था। उसकी वीरता ऐसी थी कि स्वयं भगवान कृष्ण भी विचार करते थे कि क्या वे अपने सुदर्शन चक्र से उसके पुरुषार्थ को रोक पाएंगे? अदम्य साहस: वह अपने विनाश को सामने देखते हुए भी विचलित नहीं हुआ। महादानी: वह ऐसा दानी था जिसने शीश झुकाकर वह सब कुछ दे दिया जो किसी ने भी उससे मांगा। स्वाभिमान: अर्जुन से लड़ने के लिए उसने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। उसने कभी समझौता नहीं किया, न ही कभी झुका; उसने वही किया जो उसके अंतर्मन को सही लगा। संघर्ष और पुरुषार्थ की प्रतिमूर्ति हमें कर्ण के जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। वह शरीर को मात्र एक मूर्ति मानता था, फिर भी उसी शरीर और अपने तप के बल पर उसने पूरे ...

Whiskey songs and company

"दारू का नशा जब हल्का-हल्का सा होता है, तभी अच्छा लगता है; जैसे दुनिया मधुर सी लगती है, जैसे मैं झूम सा रहा हूँ, जैसे एक नदी की धारा में बहा जा रहा हूँ और चिंता मुक्त हूँ। और जब व्हिस्की के साथ अच्छा सा साथी हो और अच्छे से गीत और ग़ज़ल का दौर हो, तो उसका मज़ा ही कुछ और होता है। आखिर ऐसा क्यों है? शायद हम ऐसी ज़िंदगी जी रहे हैं जिससे हमें ही घिन आती है और हम एक छुटकारा सा चाहते हैं।

"नदी, मनुष्य और सागर: एक आध्यात्मिक यात्रा"

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"यह भी कोई ज़िंदगी है? कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करना है और न ही यह समझ आ रहा है कि क्यों करना है। बस सब लोग कर रहे हैं, इसलिए 'करे जाओ-करते जाओ' वाला हाल है। जब कुछ नहीं करो तो करने का मन करता है, और जब कुछ करो तो लगता है कि जो कर रहे हैं उससे क्या उखाड़ लेंगे? न अपना कुछ कर पा रहे हैं, न दूसरों का। क्या कुछ ऐसा करने का कोई और रास्ता हो सकता है जिससे ज़िंदगी में सुकून मिले और अच्छा भी लगे? जीवन में एक अजीब सी बेचैनी है, आज कहीं भी ध्यान केंद्रित (focus) नहीं हो पा रहा है। शायद यह टेक्नोलॉजी के ज़्यादा इस्तेमाल की वजह से हुआ है। अब से बस एक काम को एक ही बार में पूरा करना है—जब लिख रहा हूँ, तो बस लिखता ही रहूँ और कुछ नहीं। यह बेचैनी सबको मुझसे बेहतर स्थिति में देख कर भी हो रही है; सबके पास कार है, पैसा है और मैं अगले हफ्ते से नौकरी शुरू करूँगा। हाँ, मुझे नई-नई किताबें पढ़ने में थोड़ा बहुत शौक है, चाहे वे हिंदी में हों या अंग्रेजी में, बस कहानी अच्छी होनी चाहिए।" "ज़िंदगी एक नदी की धारा की तरह ही होती है न? जब वह निकलती है तो अपने पूरे प्रवाह में होती है, अ...

Dignity Over Obligation

Dignity Over Obligation I no longer believe in unnecessary meetings with people I do not want to meet, even if they are relatives. Meeting someone merely to satisfy their ego—when they do not respect my dignity and try to interfere in my personal life—has no value for me. My life is my own. I will decide whom to meet, when to meet, and where to meet. This choice belongs to me, and I am now holding that control in my own hands. It does not matter whether they are relatives or anyone else. I do not want to appear good in others’ eyes if it means appearing bad in my own. My own self matters more to me. The world is extremely practical—no one does anything without expecting something in return, whether it is money, favor, or ego satisfaction. At least the business world is honest. Expectations are clear: what is to be given and what is to be received, and at what cost. Nothing comes without expectations. In contrast, the so-called “homely” world today is often a wolf in sheep’s skin....

On Family

What is a family- family means a harmonious ways to multiple or gene and give our gene-offspring enough capabilities to survive and pass there own gene to next level all though its sounds rogue but its a bitter biological truth every organism living on this earth is trying to do this.Now if we thinks it through Maya view than family would a strong tie which holds a society and helps its to function well now lets come to my family i have a beautiful wife and 2 little daughters sometimes i am amazed how much intelligent they are at such an early stage i feels proud of mine own gene of doing this or combination of genes of my wife sometimes i feel like i have three more mother apart from my own mother who gave me birth.Feminism its a creative,nurturing by birth they have acceptance quality from the very beginning if feminist rules the entire world that world would become a beautiful place for everyone. Its honest,dedicated,delicate,kind,motherly,violent like Kali when required,full of lif...